यूं तो वो चांद को छू कर आई है पहाड़ियों का सीना चीर चोटियों पर विजय पाई है,


👏Harpreet kour


हाथरस में हुए हादसे पर...


यूं तो वो चांद को छू कर आई है


पहाड़ियों का सीना चीर चोटियों पर


विजय पाई है, नेत्री, अभिनेत्री बन


हर जगह धाक जमाई हैं.


 "नारी" और पुरुष के लिए


इश्वर ने कोई अलग दर्जा नहीं बनाया


फिर क्यूं बराबरी का दर्जा हल्ला मचाया


देश की राजधानी हो या चार मीनार के


शहर की गलिया


या फिर हो खेत खलिहान हो या बगिया


कहाँ सुरक्षित है बिटिया


खेतों में काम करती उस यौवना


ने क्या जुर्म किया था


क्या उसका दलित होना गुनाह था


सजा का आलम इस, कदर था


माँ बाप को बेटी का शव तक ना मिला था


दरिंदो ने जुल्म इतना ढाया


काट दी उसकी जिह्ववा


कहीं सरकार तक ना पहुँच जाए


उसकी चित्कार


न्याय के लिए ना हो पाए खड़ी


तोड़ दी उसकी रीढ़ की हड्डी


अगर बहनों! अभी भी ना जागोगी


तो पछताओगी


कब ये वहशी घर में तुम्हारे घुसेंगे


स्त्री की अस्मिता पर कब तक


प्रहार करेंगे


कब तक ये समाज में निरभय


होकर घूमेंगे


दहशत अब इनके लिए जरूरी है


जहाँ दिखे ये इन्हें मार गिराना होगा


कानुन सख्त बनाना होगा...


 


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