कानपुर : 68 करोड़ का फर्जी बैंक बैलेंस दिखाकर लाखों की ठगी, पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर एफआईआर दर्ज।

एडेलवाइस का बड़ा प्रोजेक्ट दिलाने का झांसा, फर्जी बैंक स्टेटमेंट से रचा ठगी का जाल; क्रेडिट कार्ड और लोन तक कराया, किस्तों का बोझ भी पीड़ित पर डाला

कानपुर। पहले बड़े कॉरपोरेट प्रोजेक्ट का सपना दिखाया, फिर 68 करोड़ रुपये का कथित बैंक बैलेंस दिखाकर भरोसा जीता और इसके बाद लाखों रुपये हड़प लिए। एडेलवाइस कंपनी का बड़ा प्रोजेक्ट दिलाने और 50 प्रतिशत मुनाफा देने के नाम पर ठगी का यह मामला गोविंद नगर थाने तक पहुंचा है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने विकल्प श्रीवास्तव के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

शिकायत के मुताबिक, विकल्प श्रीवास्तव ने पीड़ित को बताया कि उसे एडेलवाइस कंपनी का करीब 25 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। उसने पीड़ित को अपने साथ काम करने का प्रस्ताव दिया और प्रोजेक्ट से होने वाले मुनाफे में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का लालच दिया। बड़े प्रोजेक्ट और मोटे मुनाफे का झांसा देकर धीरे-धीरे पीड़ित को अपने विश्वास में लिया गया।

68 करोड़ का स्टेटमेंट दिखाकर बनाया भरोसा

ठगी के खेल में सबसे बड़ा दांव फर्जी बैंक स्टेटमेंट का था। आरोप है कि विकल्प ने पीड़ित को स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक का ऐसा स्टेटमेंट दिखाया, जिसमें करीब 68 करोड़ रुपये की रकम खाते में दिखाई गई थी। इससे पीड़ित को लगा कि आरोपित आर्थिक रूप से मजबूत है और उसके पास प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त धन है। बाद में जब स्टेटमेंट की जांच हुई तो उसके फर्जी होने का आरोप सामने आया। इतना ही नहीं, आरोपित ने स्लैक प्लेटफार्म के जरिए चेतन नाम के व्यक्ति से भी संपर्क कराया। उसने खुद को एडेलवाइस कंपनी का वाइस प्रेसिडेंट बताया। शिकायतकर्ता के अनुसार बाद में उसका ई-मेल भी फर्जी पाया गया।

लोन लेकर दिए 3.17 लाख, किस्तें भी फंस गईं

आरोपित के झांसे में आकर पीड़ित ने प्रोजेक्ट शुरू कराने के नाम पर रकम जुटानी शुरू कर दी। सात जनवरी को 52,135 रुपये, 12 जनवरी को 2,52,404 रुपये आइडीएफसी बैंक से और 22 जनवरी को 1,13,000 रुपये एफआइबीई से लोन लेकर दिए गए। आरोप है कि विकल्प ने भरोसा दिया था कि लोन की किस्तें वही चुकाएगा। मगर बाद में किस्तें जमा नहीं कीं। नतीजा यह हुआ कि पीड़ित को ही करीब 71,157 रुपये की किस्तें अपनी जेब से चुकानी पड़ीं।

क्रेडिट कार्ड भी लिया, टिकट बुकिंग के नाम पर इस्तेमाल

आरोप है कि तीन जनवरी से 16 मार्च के बीच विकल्प ने बैंक, यूपीआइ, नकद और क्रेडिट कार्ड के जरिये पीड़ित से करीब 6.50 लाख रुपये लिए। प्रोजेक्ट से संबंधित काम, टिकट बुकिंग और अन्य खर्चों का हवाला देकर पीड़ित का क्रेडिट कार्ड भी ले लिया गया।

पीड़ित का आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो प्रोजेक्ट शुरू हुआ और न ही रकम वापस की गई। जब उसने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपित कथित तौर पर टालमटोल करने लगा।

फर्जी दस्तावेजों का भी आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विकल्प ने पीड़ित से आधार कार्ड, पैन कार्ड, स्टांप पेपर, चेकबुक समेत कई दस्तावेज लिए। बाद में बैंक स्टेटमेंट, खाता संख्या और अन्य दस्तावेजों की जांच में उनके फर्जी होने की बात सामने आई।पीड़ित ने पुलिस को बैंक रिकार्ड, ई-मेल, चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।

चौकी में बुलाकर दबाव बनाने का भी आरोप

मामले में ठगी के साथ धमकी और दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित के मुताबिक, शिकायत के बाद 15 मई को उसे गोविंद नगर थाना क्षेत्र की रतनलाल नगर चौकी में बयान के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि विकल्प अपने साथ करीब आधा दर्जन लोगों को लेकर चौकी पहुंचा और पीड़ित पर "मुकदमा मत लिखाओ, पैसा भूल जाओ" का दबाव बनाया, पीड़ित ने पुलिस आयुक्त कार्यालय में 29 मई को शिकायत देकर पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत के आधार पर गोविंद नगर थाने में एफआइआर संख्या 0239/2026 दर्ज की गई।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

अब पुलिस के सामने यह जांचने की चुनौती है कि 68 करोड़ रुपये का कथित बैंक बैलेंस आखिर किस खाते का था, फर्जी स्टेटमेंट किसने तैयार किया, एडेलवाइस के नाम पर कथित प्रोजेक्ट और वाइस प्रेसिडेंट बनकर संपर्क करने वाला व्यक्ति कौन था और 6.50 लाख रुपये की रकम आखिर कहां गई। डिजिटल चैट, ई-मेल, बैंक ट्रांजेक्शन और कथित फर्जी दस्तावेजों की कड़ियां जुड़ने पर ठगी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।

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