लखनऊ अग्निकांड के बाद भी "कानपुर" में बेसमेंट बने खतरे का अड्डा, स्कूलों में ऑडिटोरियम तो कहीं मरीजों की जांच!

संकरा रास्ता, एक ही जगह एंट्री-एग्जिट; नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बेसमेंट में एक्स-रे-अल्ट्रासाउंड की शिकायतें

कानपुर। लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद पूरे प्रदेश में बेसमेंट के इस्तेमाल और फायर सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। इसके बावजूद कानपुर में बेसमेंट के इस्तेमाल को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं।

शहर में कुछ स्कूलों के बेसमेंट में पार्किंग के बजाय ऑडिटोरियम और सामूहिक गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायत है। चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि इन जगहों पर एक साथ बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद रहते हैं।

बेसमेंट में ऑडिटोरियम, रास्ता भी संकरा

नियमों के तहत बेसमेंट का इस्तेमाल भवन के स्वीकृत नक्शे और लागू भवन मानकों के अनुरूप होना चाहिए। कई मामलों में बेसमेंट का उपयोग पार्किंग के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि किसी स्कूल के बेसमेंट में ऑडिटोरियम संचालित हो रहा है तो इसकी अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था की जांच जरूरी हो जाती है।

शिकायतों के मुताबिक कुछ परिसरों में बेसमेंट तक पहुंचने का रास्ता संकरा है। एंट्री और एग्जिट भी एक ही स्थान से होने की बात सामने आ रही है।

ऐसे में आग लगने या धुआं भरने जैसी स्थिति में बड़ी संख्या में बच्चों के एक साथ बाहर निकलने पर भगदड़ का खतरा पैदा हो सकता है।

आग लगी तो बच्चों को बाहर निकालना चुनौती

स्कूलों में छोटे बच्चों से लेकर किशोर तक पढ़ते हैं। किसी आपात स्थिति में सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त और वैकल्पिक निकास मार्ग बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

सवाल यह है कि जिन स्कूलों के बेसमेंट में बड़ी संख्या में बच्चे बैठते हैं, वहां इमरजेंसी एग्जिट, सीढ़ियों, वेंटिलेशन, फायर अलार्म और अग्निशमन व्यवस्था मानकों के अनुरूप है या नहीं?

क्या संबंधित विभागों ने इन परिसरों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया है?

नर्सिंग होम और पैथोलॉजी सेंटर भी सवालों के घेरे में

बेसमेंट के इस्तेमाल का मामला केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है। कानपुर में कुछ नर्सिंग होम और पैथोलॉजी/डायग्नोस्टिक सेंटरों को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं।

शिकायत है कि कुछ स्थानों पर बेसमेंट में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच की जा रही हैं।

यदि ऐसा है तो यह जांच जरूरी है कि संबंधित भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है और बेसमेंट में इस प्रकार की गतिविधि के लिए आवश्यक अनुमति एवं सुरक्षा मानक पूरे किए गए हैं या नहीं।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि नर्सिंग होम में आने वाले कई मरीज चलने-फिरने में सक्षम नहीं होते। किसी आपात स्थिति में उन्हें बेसमेंट से बाहर निकालना सामान्य व्यक्ति की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल हो सकता है।

एक्स-रे मशीन लगी है तो रेडिएशन सेफ्टी भी जांचे प्रशासन

यदि किसी बेसमेंट में एक्स-रे मशीन संचालित हो रही है तो केवल फायर सेफ्टी ही नहीं, बल्कि संबंधित रेडिएशन सेफ्टी और वैधानिक अनुमतियों की भी जांच आवश्यक होगी।

इसी तरह अल्ट्रासाउंड सेंटरों के लिए भी संबंधित स्वास्थ्य विभाग और अन्य लागू नियमों के तहत आवश्यक पंजीकरण और अनुमतियों की जांच की जानी चाहिए।

लखनऊ की घटना के बाद कानपुर में कितनी जांच?

लखनऊ हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि कानपुर में प्रशासन ने क्या कदम उठाए?

क्या शहर के सभी स्कूलों, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बेसमेंट की जांच कराई गई?

अगर जांच हुई तो कितने संस्थानों में नियमों का उल्लंघन मिला? कितनों को नोटिस दिया गया? कितनों को सील किया गया और कितनों के खिलाफ कार्रवाई की गई?

प्रशासन से 10 सवाल

  1. कानपुर में बेसमेंट वाले कितने स्कूल हैं?
  2. कितने स्कूलों के बेसमेंट में ऑडिटोरियम या सामूहिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं?
  3. क्या इनका इस्तेमाल स्वीकृत नक्शे के अनुरूप है?
  4. बेसमेंट में प्रवेश और निकास के कितने रास्ते हैं?
  5. क्या सभी परिसरों में वैकल्पिक इमरजेंसी एग्जिट है?
  6. कितने नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं?
  7. क्या बेसमेंट में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी सेवाओं की अनुमति और सुरक्षा मानक पूरे हैं?
  8. लखनऊ हादसे के बाद कानपुर में कितने संस्थानों का निरीक्षण हुआ?
  9. कितने संस्थानों को नोटिस या सीलिंग की कार्रवाई की गई?
  10. क्या प्रशासन स्वीकृत नक्शे से अलग इस्तेमाल करने वाले परिसरों पर कार्रवाई करेगा?

हादसे के बाद कार्रवाई नहीं, पहले हो रोकथाम

आग लगने के बाद राहत और बचाव कार्य करना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि ऐसे संभावित खतरे पहले ही खत्म किए जाएं।

अगर किसी स्कूल के बेसमेंट में बड़ी संख्या में बच्चे बैठ रहे हैं, रास्ता संकरा है और एंट्री-एग्जिट एक ही जगह से है, तो प्रशासन को इसकी जांच हादसे से पहले करनी चाहिए।

इसी तरह यदि किसी नर्सिंग होम या डायग्नोस्टिक सेंटर में बेसमेंट के अंदर मरीजों से जुड़ी गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो वहां भी भवन, अग्निसुरक्षा, आपातकालीन निकास और संबंधित स्वास्थ्य मानकों की संयुक्त जांच जरूरी है।

लखनऊ की घटना ने चेतावनी दे दी है। अब सवाल यह है कि कानपुर प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है।

बच्चों और मरीजों की जान से बड़ा कोई नियम या कारोबार नहीं

बेसमेंट का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए स्वीकृत है, वहां कितने लोग मौजूद रहते हैं, आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के कितने रास्ते हैं और फायर सेफ्टी के मानक पूरे हैं या नहीं—इन सवालों का जवाब प्रशासन को देना होगा।

क्योंकि हादसा होने के बाद जिम्मेदार तलाशने से बेहतर है कि खतरे को हादसे से पहले ही खत्म कर दिया जाए।

अब नजर कानपुर जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग, कानपुर विकास प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर है।

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