कानपुर : खबरों का जादूगर ज्ञानेंद्र शुक्ला खुद बने दर्दनाक खबर।

कानपुर। जिनकी कलम और खबरों की समझ ने वर्षों तक दूसरों की कहानियों को आवाज दी, आज वही खबरों के जादूगर ज्ञानेंद्र शुक्ला खुद पत्रकारिता जगत की सबसे दर्दनाक खबर बन गए। करीब दो दशक से अधिक समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला का लगभग 50 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से कानपुर सहित पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

ज्ञानेंद्र शुक्ला ने अपने करीब 20 वर्षों के पत्रकारिता जीवन में कानपुर के कई बड़े समाचार चैनलों के साथ काम किया और अपनी अलग पहचान बनाई। खबरों की गहरी समझ, घटनाओं की तह तक जाने की क्षमता और पत्रकारिता के प्रति समर्पण ने उन्हें अपने साथियों के बीच खास मुकाम दिलाया। वह कल्याणपुर स्थित अपने आवास पर रहते थे।

अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान निधन

जानकारी के अनुसार, करीब दस दिन पूर्व अचानक ज्ञानेंद्र शुक्ला की तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद उन्हें कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें लखनऊ स्थित पीजीआई रेफर कर दिया। वहां चिकित्सकों की टीम ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनका निधन हो गया।

उनके निधन की खबर सामने आते ही पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई। पत्रकारों, राजनीतिज्ञों और पुलिस विभाग के अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने उनके आवास पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। सभी ने ज्ञानेंद्र शुक्ला के निधन को पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।

नई पीढ़ी के पत्रकारों के रहे मार्गदर्शक

ज्ञानेंद्र शुक्ला सिर्फ एक पत्रकार नहीं थे, बल्कि कानपुर की पत्रकारिता में एक पूरी पीढ़ी के मार्गदर्शक भी रहे। उनके साथ काम करने और उनसे पत्रकारिता की बारीकियां सीखने वाले कई पत्रकार आज देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

साथी पत्रकारों के मुताबिक, ज्ञानेंद्र शुक्ला की सबसे बड़ी खूबी उनकी खबरों को समझने और उन्हें प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता थी। सहज और मिलनसार स्वभाव के कारण वह पत्रकारों के बीच लोकप्रिय थे। उनके अनुभव से युवा पत्रकारों को हमेशा सीखने का अवसर मिला।

आज खबर खुद उनकी कहानी कह रही है

विडंबना देखिए कि जिस पत्रकार ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा दूसरों की खबरों को सामने लाने में लगा दिया, आज उसी ज्ञानेंद्र शुक्ला के निधन की खबर पत्रकार जगत को लिखनी पड़ रही है। जिनकी खबरों में हमेशा घटनाओं की धड़कन सुनाई देती थी, आज उनके जाने से पत्रकारिता जगत में एक गहरा सन्नाटा है।

ज्ञानेंद्र शुक्ला का जाना केवल एक पत्रकार का जाना नहीं, बल्कि पत्रकारिता की एक ऐसी आवाज का खामोश हो जाना है, जिसने करीब दो दशक तक अपनी अलग पहचान बनाए रखी। उनकी सहजता, व्यवहार, अनुभव और पत्रकारिता के प्रति समर्पण को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

उनके निधन पर पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ज्ञानेंद्र शुक्ला का जाना पत्रकारिता के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने पीछे ऐसी यादें और पत्रकारिता की ऐसी विरासत छोड़ी है, जिसे उनके साथी और शिष्य हमेशा संजोकर रखेंगे।

जिसने पूरी जिंदगी खबरों को आवाज दी, आज उसकी खामोशी सबसे बड़ी खबर बन गई।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और उनके शिष्यों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

भावभीनी श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।

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