कानपुर / प्रयागराज : राजाराम वर्मा हत्याकांड में ‘आगे जांच’ का आदेश रद, हाईकोर्ट ने कहा- ट्रायल कोर्ट की अनुमति जरूरी...


बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री समेत तीन आरोपितों को राहत; बिना अदालत की अनुमति पुलिस नहीं कर सकती आगे की जांच

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर के चर्चित राजाराम वर्मा हत्याकांड में संयुक्त पुलिस आयुक्त द्वारा पांच दिसंबर 2025 को पारित ‘आगे जांच’ के आदेश को अवैध करार देते हुए रद कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद पुलिस अपने स्तर से आगे की जांच शुरू नहीं कर सकती। इसके लिए संबंधित ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेना अनिवार्य है।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने राकेश कुमार तिवारी, रेखा वर्मा और राज बहादुर की ओर से दाखिल तीन आपराधिक रिट याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए यह फैसला सुनाया। तीनों इस मामले में सह-आरोपित हैं। हाईकोर्ट के आदेश से बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री समेत तीन आरोपितों को राहत मिली है।

घर के गेट पर मारी गई थी गोली

मामले में 23 दिसंबर 2021 को नरेंद्र देव ने नवाबगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि 22 दिसंबर 2021 की शाम उनके पिता राजाराम वर्मा को घर के गेट पर दो अज्ञात बदमाशों ने गोली मार दी। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

एफआईआर के अनुसार, राजाराम वर्मा का एनआरआई सिटी के मालिकों और नंद किशोर के बेटे राज बहादुर से लंबे समय से जमीन संबंधी विवाद चल रहा था।

पुलिस ने कई आरोपितों के नाम किए थे शामिल

मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने दिलनियाज उर्फ रेहान और रोहित यादव को गिरफ्तार किया था। बाद में अंकित यादव और राम खिलावन के नाम भी जांच में सामने आए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष तिवारी और गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी ने कोर्ट में दलील दी कि संयुक्त पुलिस आयुक्त ने अदालत की अनुमति के बिना आगे की जांच का आदेश जारी किया था।

कोर्ट ने आवेदन को भी माना अपर्याप्त

मामले में 17 दिसंबर 2025 को अदालत में एक आवेदन दाखिल किया गया था। इसमें केवल यह जानकारी दी गई थी कि संयुक्त पुलिस आयुक्त ने आगे की जांच का आदेश दिया है और जांच अधिकारी को केस डायरी देखने की अनुमति दी जाए।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह आवेदन सीआरपीसी की धारा 173(8) अथवा बीएनएसएस की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच की अनुमति मांगने वाला आवेदन नहीं था। अदालत को केवल पुलिस के आदेश की जानकारी दी गई थी।

अब ट्रायल कोर्ट से लेनी होगी अनुमति

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी आगे की जांच के लिए पुलिस को संबंधित मजिस्ट्रेट या सेशन कोर्ट/ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेना जरूरी है।

कोर्ट ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि पुलिस चाहे तो अब ट्रायल कोर्ट के समक्ष आगे की जांच की अनुमति के लिए विधिवत आवेदन प्रस्तुत कर सकती है। ट्रायल कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद ही आगे की जांच की जा सकेगी।

हाईकोर्ट के इस फैसले को चार्जशीट दाखिल होने के बाद पुलिस द्वारा की जाने वाली आगे की जांच की प्रक्रिया के संबंध में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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