यूपी रेरा का बड़ा फैसला: अब सिर्फ 1000 रुपये में वारिसों के नाम होगी संपत्ति, बिल्डरों की मनमानी पर लगेगी लगाम।

लखनऊ, 7 मई 2026 | UPTV Live रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में घर-दुकान खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। यूपी रेरा ने नियम 47 में संशोधन कर संपत्ति हस्तांतरण का शुल्क तय कर दिया है। अब मूल आवंटी की मृत्यु के बाद कानूनी वारिसों को फ्लैट या प्लॉट ट्रांसफर कराने के लिए लाखों रुपये नहीं, सिर्फ 1000 रुपये देने होंगे। ये नियम 25 मार्च 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो चुका है।

क्या है पूरा मामला
यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने बताया कि प्राधिकरण के नौ वर्ष पूरे होने पर नियमों की समीक्षा की गई। इसमें सामने आया कि गैर पंजीकृत सोसाइटियों के प्रमोटर नामांतरण के नाम पर उत्तराधिकारियों से लाखों रुपये वसूल रहे थे। कुछ बिल्डर तो प्रति वर्ग फीट के आधार पर शुल्क मांगते थे, जिससे रकम लाखों में पहुंच जाती थी।

इन्हीं शिकायतों के आधार पर यूपी रेरा ने रियल एस्टेट अधिनियम 2016 की धारा 85 के तहत विनियमों में 10वीं बार बड़ा संशोधन किया है।

नया शुल्क ढांचा: किसे कितना देना होगा
1. कानूनी वारिस - पति/पत्नी, पुत्र, पुत्री: सिर्फ 1000 रुपये शुल्क। पहले बिल्डर मनमाना शुल्क वसूलते थे, कई बार लाखों रुपये तक।
2. परिवार के बाहर के व्यक्ति: अधिकतम 25,000 रुपये शुल्क। पहले नगर निगम में 1000 से 5000 रुपये, गिफ्ट पर 1 प्रतिशत या 10,000 तक, कुछ सोसाइटी में 25,000 तक लिया जाता था।

नोट: परिवार के बाहर संपत्ति ट्रांसफर करने पर कोई नया बिक्रय विलेख या पट्टा समझौता नहीं किया जाएगा।

क्यों जरूरी था ये बदलाव
1. पारदर्शिता: आवंटी की मृत्यु के बाद संपत्ति अधिकारों के हस्तांतरण के लिए पारदर्शी प्रक्रिया बनेगी।
2. बिल्डरों पर अंकुश: यूपी रेरा ने माना कि बिल्डरों द्वारा अनुचित प्रथाएं अपनाई जा रही थीं।
3. उत्तराधिकारियों को राहत: पहले नगर निगम वसीयत के लिए 1000-5000 रुपये लेता था, लेकिन प्राइवेट सोसाइटियों में कोई सीमा नहीं थी।

कानूनी वारिसों के लिए जरूरी दस्तावेज
सिर्फ 1000 रुपये में नामांतरण कराने के लिए ये 3 दस्तावेज जमा करने होंगे:
1. मृत्यु प्रमाण पत्र - मूल आवंटी का
2. उत्तराधिकार प्रमाण पत्र - सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी
3. अनापत्ति प्रमाण पत्र - अन्य सभी कानूनी वारिसों से

अपंजीकृत प्रोजेक्ट वालों को भी मिलेगी मदद
यूपी रेरा अध्यक्ष ने साफ किया कि अब प्राधिकरण उन घर व दुकान खरीदारों की शिकायत भी सुनेगा जिनके प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत ही नहीं हैं। ऐसे खरीदार सीधे यूपी रेरा में आवेदन करके प्रतिपूर्ति और कब्जा हासिल कर सकते हैं।

साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई प्रमोटर परियोजना का पंजीकरण नहीं कराता है तो उस पर परियोजना लागत का 10 प्रतिशत जुर्माना और तीन साल तक की जेल का प्रावधान है।

क्या बोले यूपी रेरा अध्यक्ष
संजय भूसरेड्डी ने कहा कि शिकायतकर्ता का सबसे पहला हक परियोजना प्रमोटर पर ही शिकंजा कसना है। नियम के अनुसार ये देखना होगा कि संबंधित परियोजना यूपी रेरा में पंजीकृत है या नहीं। इस कदम का मकसद खरीदारों के हितों की रक्षा करना है।

UPTV Live के लिए लखनऊ से विशेष रिपोर्ट

अगर आपकी सोसाइटी भी नामांतरण के लिए ज्यादा पैसा मांग रही है तो यूपी रेरा के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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